मेरी मंगल कामना है, ये गुलिस्तां रहे, सदा खिलता हुआ,
हम मुदित हो देखा करें, नित इस चमन को, हँसता हुआ ..
मेरी कामना है, अपनी साधना से, अर्जित पुण्य का वितरण करूँ,
मात-पिता के, जहां चरण पढ़े, सर्वप्रथम उस धरा को नमन करूँ!
महामानव बोधिसत्व बाबासाहेब की, अग्रबोधि को शत-शत नमन,
सकल दासता के मुक्ति दाता, तुमको अपना जीवन अर्पण रूँ!
तुम्हारे त्याग पर, तुम्हें समर्पित करूँ, ये समाज मुस्काता हुआ,
और तुम मुदित हो देखा करो, नित इस चमन को, हँसता हुआ!
आचार्य देव! आपसे मैं ज्ञान पाकर, सदा दूसरों का तम हर्ता रहूँ,
तथागत के बोधि प्रताप से, ज्ञान की धारा में, नित-नित बहता रहूँ!
धन्य हूं मैं! सक्षम स्वस्थ शरीर पाकर, होश में सदा जीवन जिऊं,
जीवन साथी के प्रति कृतज्ञ हूँ, उनके मंगल की सदा भावना करूँ!
बुद्ध, धम्म, संघ के प्रताप से, परिजनों को देखूँ सदा खिलता हुआ,
और हम मुदित हो देखा करें, पल-पल पुत्र-पुत्रियों को हँसता हुआ!
सगे और निकट कल्याण मित्र, मेरे सभी सदा तत्पर उपकारी
मंगल मैत्री है मेरी, उन सभी का जीवन, सदा प्रफुल्लित होता रहे!
जब कभी बादलों ने ढकना चाहा, मुझे तब-तब, भले मानुष मिले,
मंगल कामना है मेरी, उन सभी का जीवन, सदा फलित होता रहे
पूर्वजों की संचित धनसंपदा से, देखूँ सभी का चेहरा खिलता हुआ,
इस पवित्र आवास पर देखूँ, आत्म ज्ञान का दीप सदा जलता हुआ!
मेरी मंगल कामना है, ये गुलिस्तां रहे, सदा खिलता हुआ,
हम मुदित हो देखा करेें, नित इस वतन को, हँसता हुआ ...
- अजय शोभने
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