गुलामी की बेड़ियो मे जब
जकड़ा भारत सारा था
हर व्यक्ति झेल रहा
अत्याचार और प्रताड़ना था
ब्रिटिश हुकूमत राज नही
करा रहा गुलामी था
हर इंसान पीड़ित हो
कर रहा गुलामी था
साहस किसी का था नही
विरोध कर कोई नही पाता था
मासूम निर्दोष इस अत्याचार से
पीड़ित हो मारा जाता था
फिर एक चिंगारी उठी बैरकपुर से
पूरा ब्रिटिश हुकूमत दहला था
मंगल पांडे नाम की क्रांति का नाम
पूरे हिंदुस्तान मे फैला था
प्रथम गोली चली उस बंदूक से
जो मंगल पांडे ने चलाई थी
पूरे भारतवर्ष मे
क्रांति की लहर दौड़ाई थी
फांसी के तख्ते तक
हल्ला बोल का नारा था
वर्ष 1857 में
मंगल पांडे बना ज्वाला था
इस विद्रोह से फैली क्रांति ने
स्वतंत्रता तक पहुंचाया था
पूरे भारतवर्ष मे
अमर तिरंगा लहराया था
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