उम्र भर लहरों से लड़ते रहे,
तब कहीं जाकर साहिल मिला है।
दिल दे दिया, जाँ दे दी तब जाकर,
हमें दीदार-ए-दिलबर मिला है।।
-आदित्य दाहिया
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