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मैं एक पत्रकार हूं

                
                                                         
                            जन-जन को सुना मैंने तभी तो शब्दों को चुना मैंने
                                                                 
                            
हर गली हर मोहल्ले को कदम कदम चूमा मैंने
क्यों मेरी कलम और मेरे शब्दों पर पहरा तेरा
मैं एक पत्रकार हूं जनता की आवाज को चुना मैंने

सफेदपोश के झूठ को खूब गली-गली सुना मैंने
अपनों पर हाथ फेरते उनको भी खूब देखा मैंने
मेरे कैमरे में कैद उस छायाचित्र से क्यों डरते हो
मैं एक पत्रकार हूं जनता की आवाज को चुना मैंने

मेरी कलम की हिंदी पर बिंदी का भी महत्व देखा मैंने
सफेदपोश के इतिहास को सच्चाई में बदला मैंने
उजड़े हुए गांव की तस्वीर से क्यों छुपते हो साहिब
मैं एक पत्रकार हूं जनता की आवाज को चुना मैंने

लोकतंत्र की भीड़ से भागते हुए कभी देखा मैंने
सच्चाई के प्रश्नों से तुम्हें बचते हुए देखा मैंने
पर कुतरने की कला अब समाज सीख चुका है
मैं एक पत्रकार हूं जनता की आवाज को चुना मैंने

- विशाल पैन्यूली
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3 वर्ष पहले

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