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यहाँ दामन थाम बैठे

                
                                                         
                            अपने हस्ती के यहाँ दामन थाम बैठे,
                                                                 
                            
मैं कहता रहा यूं ही ,
तुम फुर्सत में ,
हमें भूलते गए ।

क्या
कहूंगा अब की ,
क्या कहानी,
लिखा कुछ नहीं है,
हसरतें का दीवानगी बताओ ।

अपने इस हाल का कुछ मंजिल हमसे भी मिलाओ क्या बार-बार होगा मुमकिन हमसे तुम्हारी मुलाकातें।

छोड़ दिया
बार-बार कह रही हूं तराने दे दो क्या भीगी रातों का तुम भी बेसब्री से इंतजार में लगे हो

हम भी खामोश कुछ पल के लिए बेतवा हो गए हैं
सब कुछ यह फ़िक्र है तेरी पलकों के साए हैं
कि सब कुछ भूल होकर हम तेरे पलकों के साए है ।

यूं ही हसरतें जमानत कर तू हमें आजमा रही है ,
क्या कहूं खुद को मैं ,
कितना बेकाबू बन गया हूं ,
जो तुम दिखते हो ,
हसरतें आंखों की हम भी बेताब होकर इंतजार करते हैं ।

यूं ही हम भी बेकाबू हो तेरा इंतजार करते हैं समान है सामने की हमारी परवाह है तेरे इस इंतजार की घड़ी से नाता पुराना है।

बार-बार कहे ,
पर तारीफ़ ना अब हमारी तुम ,
किया जो बात कहना था ।

मुझे आज फिर कहना है ,
क्या यह जो ये कदम तुम थाम लो एक बार मैं जीवन त्याग कर तुमरे भरोसे साथ रहूं ,
इंतजार भयभीत करके तुम हमें व्याकुल न करना यूं ही हसरतें की आखिर तुम रूठ कर मन जरूर जाना क्या

मैं भी कामयाब हूं ,
तू भी हस्ती है।
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एक घंटा पहले

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