तड़पते हैं हम उनके सिर्फ़ जवाब की ख़ातिर,
न जाने क्यों धड़कन उनके ही पास रहती है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X