हलका सा तुम रुक सी गई, हम भी वहीं ,
सब्र कर लेती, महसूस कर झलक से।
वह बात न करें हमसे तो क्या शिकवा करें ,
एकतरफ़ा ही सही, पर रिश्ता से है ।
उनकी ख़ामोशी में भी एक अजीब जादू है,
जो गुज़रती सीधे हमारे दिल की सड़क से।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X