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शुक्र है उस खुदा का, कि वो हिसाब पूरा हुआ

                
                                                         
                            रास्ते अलग हुए तो क्या, एक हिसाब पूरा हुआ,
                                                                 
                            
जो था अधूरा दरमियां, वो ख्वाब पूरा हुआ।
शायद पिछले किसी जन्म का कोई कर्ज रहा होगा,
तेरा मेरी जिंदगी में आना भी तो एक फर्ज रहा होगा।
तूने अपना हिस्सा निभाया, मैंने अपना फर्ज चुकाया,
कर्मों के उस खेल ने देखो, कैसा मोड़ दिखाया।
न कोई शिकवा तुझसे अब, न किस्मत से कोई गिला है,
जितना लिखा था लकीरों में, बस उतना ही मिला है।
तू आई थी एक कर्ज की तरह, जो आज उतर गया,
तू अपने रास्ते चल दी, मेरा वक्त भी संवर गया।
दुआ है तू जहाँ भी रहे, सदा मुस्कुराती रहे,
तेरी जिंदगी खुशियों के नए गीत गाती रहे।
अब मैं भी बढ़ चला हूँ अपनी नई राहों पर,
न कोई बोझ है दिल पर, न कोई बंदिश सासों पर।
एक पन्ना था मोहब्बत का, जो बंद हुआ सो हुआ,
शुक्र है उस खुदा का, कि वो हिसाब पूरा हुआ।
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एक घंटा पहले

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