तुम कभी ऐसी लड़की न बनना,
जिसकी तारीफ़ में बस इतना कहा जाए
"कितनी समझदार है, चुप रहकर सह लेती है।"
क्योंकि हर बार चुप रहते रहते
कहीं भीतर कुछ टूटता है,
जो बाहर से नहीं दिखता,
पर खुद को मालूम होता है।
तुम वो लड़की बनना
जो अपने मन की सुनती है,
जो डर के बावजूद बोलती है,
जिसके अंदर एक आवाज़ है
जो कहती है "यह ठीक नहीं",
और वो उसे दबाती नहीं।
क्योंकि परवरिश का मतलब
सहना सिखाना नहीं होता,
परवरिश का मतलब है
तुम्हें यह विश्वास दिलाना
कि तुम्हारा दर्द भी सच है,
तुम्हारी बात भी मायने रखती है।
तुम रोना चाहो तो रोना,
पर चुप मत रहना।
तुम गिरना चाहो तो गिरना,
पर खुद को छोटा मत समझना।
क्योंकि असली ताक़त सहने में नहीं,
अपने आप को महसूस करने में है
और उस एहसास को
बिना शर्म के जी लेने में है।
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