चंद रास्ते अभी भी न-मुकम्मल है
न जाने कितने ख़्वाब भी अधूरे हैं
तस्वीरें हयात को बेशुमार रंग दिये
पर उसमें कुछ रंग अभी भी फीके हैं
जो भी बिछड़े हमसे जो भी छूटा हमसे
वो सब वाबसता हुआ यादों मे
जो बचा वही बसा लिया ख़यालों में
वक़्त की हर चोट और दर्द को झेला
पर कभी न रोना सीखा हमने
नाकारा साबित न हुए नाकामियों से
बस सफ़र जीने का जारी रखा हमने
कल की है किसको ख़बर अवधी
अब ज़िंदगी को जीना सीखा हमने
-अभय ‘अवधी’
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