आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

भर रहा था हर कोई दम आशिक़ी का

                
                                                         
                            भर रहा था हर कोई दम आशिक़ी का
                                                                 
                            
क्यूं अदीबों क्या हुआ है शायरी का

ऐब औरों के तुझे दिखते बहुत हैं
बन मुहासिब तू कभी अपनी कमी का

दूसरों के दर्दों ग़म महसूस कर लो
हम सभी को है ख़याल अपनी ख़ुशी का

नेकियों की एक गठड़ी भी नहीं है
फ़ायदा कुछ तो उठा लो ज़िंदगी का

तीरगी में रौशनी दिखलाएगा वो
छोड़ भी दो अब इरादा खुदकुशी का

लौट कर जाएंगे हम सब जिसकी जानिब
नाम लिखना अपने दिल पर बस उसी का

पाक रख गोशा ए दिल आज़िम हमेशा
इस तरह से हक़ अदा कर बंदगी का
-अब्दुल सलाम
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर