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सुब्ह को सब बुझे

                
                                                         
                            शाम के सब दिये
                                                                 
                            

शाम को सब जले
जा    मुडेरे    सजे
रात   बीती   जहाँ
सुब्ह को सब बुझे

पर  बुझे  वो  दिये
फिर खटकने लगे
आई  जो  दोपहर
घर  से  फेके  गये

खाक  से   थे  बने
खाक में  जा मिले
दूसरी   शाम  तक
शाम के  सब दिये
-हमीद कानपुरी
 
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22 घंटे पहले

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