हिन्दी हिन्दी
हिन्दी मे ही बोता हूँ मैं
हिन्दी में ही खोता हूँ मैं
हँसता गाता हिन्दी में ही
हिन्दी में ही रोता हूँ मैं
खूब लगाता इसमें गोते
खुश भी इसमें होता हूँ मैं
कोरस मेरे हिन्दी में ही
हिन्दी का ही तोता हूँ मैं
जब होता है ग़म कोई तो
पलकें खूब भिगोता हूँ मैं
-हमीद कानपुरी
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