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ग़ज़ल

                
                                                         
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बे सबब यूँ ही नहीं शिकवा करो
कुछसमझकर सोच करबोलाकरो

गर फ़तहयाबी यक़ीनी चाहते
दूर तक पहले ज़रा सोचा करो

साथ मिलने से बड़ी राहत रहे
काम कोई भी नहीं तन्हा करो

ठोस पाने की करो कोशिश सदा
यार जुमलों से नहीं बहला करो

पाक परवर पर भरोसा रख हमीद
कुछनिगेटिव मतकभी सोचा करो
-हमीद कानपुरी
 
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17 घंटे पहले

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