हौसला फिर से दिखाया जाए
ज़ुल्म को मिल के हराया जाए
द्वेष अरु डाह मिटाया जाए
प्यार से हाथ मिलाया जाए
बात को यार बनाया जाए
अब नहीं ताव दिखाया जाए
नफ़रतों से नहीं चलती दुनिया
प्यार का शह्र बसाया जाए
ज़ल्दबाज़ी नहीं अच्छी इतनी
सब्र करना भी सिखाया जाए
-हमीद कानपुरी
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