ये मैने ख़्वाब में देखा के एक भूखा कबूतर हूँ
सुबह उठकर परिंदों को मै दाना डाल देता हूं
मेरी मां ने कहा था ये, किसी पर ज़ुल्म मत करना
जो दिख जाए कहीं चींटी मै आटा डाल देता हूं
मेरी बच्ची के चेहरे पर उदासी देखता हूं जब
हो कितना भी बड़ा जलसा मै फौरन टाल देता हूं
-अब्दुल बासित
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