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परिवार

                
                                                         
                            "कोयले और सोने को एक तराजू में कौन तोलेगा?
                                                                 
                            
गर मां नहीं होगी तो मुझको हीरा कौन बोलेगा?
जिंदगी की कशमकश में उन्हें भूलते जा रहे हैं हम।
पिता नहीं होंगे तो किस्मत का ताला कौन खोलेगा?
भागदौड़ भरी जिंदगी में अकेला है हर एक शख्स।
बहन नहीं होगी तो साथ में कौन खेलेगा?
जमाना तुम्हें हर वक्त गिराने में लगा है।
भाई नहीं होंगे तो तुम्हारे हक में कौन बोलेगा?

घर में हर शख्स का रहना जरूरी है 'अब्दुल'।
साथ नहीं होंगे तो परिवार कौन बोलेगा?"
अब्दुल बासित
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एक वर्ष पहले

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