हादसों पर हादसा होता गया
और मन ये सोच कर रोता गया
भांग पीकर हस रहे सब लोग थे
मैं अभागा दर्द से मरता गया
हाथ से गायब हुयी दो अंगुली
पैर का घुटना जरा फूटा गया
रक्त से भीगी पड़ी थी आँख भी
जख्म शायद आँख पर गहरा गया
साथ वाले लोग भी ना दिख रहे
बस अँधेरा दूर तक फैला गया
हादसे में खो गया था फोन भी
जेब से बटुआ यही लूटा गया
पूछने पर बात ये मालूम हुयी
कैब वाली बात पर मसला गया
रोज़ जाता हूँ अकेला राह से
आजतक ना इस तरह मसला गया
लोग भागे जा रहे थे उस तरफ
इस तरफ इक भीड़ का जत्था गया
शख्स कोई आ इधर टकरा गया
और फिर मैं भीड़ में दबता गया
लात जूते ठोकरों की चोट से
दर्द से सारा बदन टूटा गया
और फिर ये कट गयी दो अंगुली
खून पानी की तरह बहता गया
दोष मेरा क्या जरा इतना कहो
किसलिए में राह में रौंदा गया
पूछता हूँ मैं ओ श्रीमान सुनो
फायदा घाटा यहाँ किसका हुआ
डेढ़ घंटा ही रुकी थी मीडिया
जोर मुझपर डालकर पूछा गया
हिन्दू थे या कोई इस्लाम थे
किस वजह से आप को कूटा गया
या सियासत की नई ये चाल थी
आपको पैसा दिखा बांटा गया
नाम क्या है काम क्या है आपका
आपको ही क्यों भला छांटा गया
या दिखावा कर रहे तुम नाम का
या ज़हन में रोष का कांटा गया
हस रहा था मैं अभी उस बात पर
मीडिया के कान कुछ आधा गया
चार दिन की टीआरपी के लिए
धर्म को फिर धर्म से काटा गया
ठीक ऐसे और भी घायल यहाँ
मौन थे सब दर्द कब देखा गया
मैं पड़ा हूँ चार दिन से खाट पर
आजतक ना आप से झांका गया
माफ़ करना गर हुयी कोई खता
मैं जरा जज़्बात में बहता गया
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