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तनहा

                
                                                         
                            बीच चौराहे लाके उसने, खड़ा कर दिया
                                                                 
                            

मुजरिम हूँ मैं महोब्बत में,ये फतवा कर दिया

न हूँ मैं आज़ाद न मिली सजा यारो

ये कोनसा मैंने इतना संगीन जुर्म कर दिया

हम छोड़ के सब कुछ बैठे थे ,तेरे दर पे आके जो

तेरे दर के थे दरबान क्यों दर-ब-दर कर दिया

कोई कहे उसे जाकर ओह ज़ालिम ऐसा नहीं करते

जशन -ए -बहारा आदम क्यों इतना तनहा कर दिया 



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7 वर्ष पहले

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