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चक्र उठाओ हे भगवन्!

                
                                                         
                            चक्र उठाओ हे भगवन्!
                                                                 
                            

आज जन्म-अष्टमी है तेरी,
तुम पीड़ सुनो प्रभुवर मेरी!
काटो संकट का यह जीवन,
समय आ गया दो दर्शन, अब चक्र उठाओ हे भगवन्!

गर्दन काटो भ्रष्टाचार की,
जड़ से मिटाओ नीति छार की,
रोको अधर्म का यह वर्धन,
समय आ गया दो दर्शन, अब चक्र उठाओ हे भगवन्!

संकट में है नारी-गरिमा,
चीख रही घर-घर की महिमा,
करो बेटियों का अब रक्षण,
समय आ गया दो दर्शन, अब चक्र उठाओ हे भगवन्!

सुध लो इस बेबस राही की,
कमर तोड़ दो महँगाई की,
कंस-दमन सा कर दो मर्दन,
समय आ गया दो दर्शन, अब चक्र उठाओ हे भगवन्!

हिंसा होती है बात-बात में,
विष घुला हुआ है धर्म-जात में,
काटो नफ़रत का यह बंधन,
समय आ गया दो दर्शन, अब चक्र उठाओ हे भगवन्!

रोता अन्नदाता सड़कों पर,
न्याय न मिलता अपने हक़ पर,
शात करो भारत का क्रंदन,
समय आ गया दो दर्शन, अब चक्र उठाओ हे भगवन्!

तपे जेठ में जो दिन-रात,
सूखी रोटी और खाली हाथ,
दूर करो निर्धन का शोषण
समय आ गया दो दर्शन, अब चक्र उठाओ हे भगवन्!

संभवामि' का वचन निभाओ,
हे योगेश्वर अब तो आओ!
पावन कर दो थल-अंबर-मन,
समय आ गया दो दर्शन, अब चक्र उठाओ हे भगवन्!
- प्रवेश कुमार धानका
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2 घंटे पहले

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