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संत कबीर

मैं इनका मुरीद

अवधूत कबीर विद्रोह से शुरू होते हैं और प्रेम पर मुक्त होते हैं...

शरद मिश्र,अमर उजाला काव्य डेस्क नई दिल्ली

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कबीर को हिंदी साहित्य का अवधूत कहा जाता है। उनका अदम्य साहस उन्हें रहस्यवाद के एक शाश्वत स्तंभ की संज्ञा देता है। कबीर विद्रोह से शुरू होते हैं और प्रेम पर मुक्त होते हैं। उनका रहस्यवाद अंत में प्रेम से ही प्रकाशित होता है। जगत में प्रखर पुंज बनकर साहित्यिक आलोक बिखेरता है। अमूमन रहस्यवाद में तीन अवस्थाएं होती हैं। प्रेम, परिचय और मिलन। कबीर के साहित्य में अद्वैत के प्रति प्रेम, उसका परिचय और बाद में उससे मिलकर अनुभूति को महसूस करना ही मुख्य केंद्र रहा है। ईश्वरीय रहस्य को अनुभव करने के बाद उसे मनुष्य के हृदय की परिधि में लाकर मानवीय संवेदना देना कबीर की मुख्य विशेषता रही है।
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कबीर भक्त पहले थे बाद में ज्ञानी

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