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'ज़िंदगी' पर 20 बेहतरीन शेर...

'ज़िंदगी' पर 20 बेहतरीन शेर
                
                                                         
                            ज़िंदगी बड़ी अजीब है, इससे जब भी मिलने की कोशिश करेंगे अजनबी लगेगी। हर एक अपने एहसासात हैं। शायरों ने भी अपने नजरिए से ज़िंदगी को देखा और अपने एहसासों को लफ़्ज दिया। पेश है ज़िंदगी और दुनियादारी पर शेर- 
                                                                 
                            

ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था
हमीं सो गए दास्तां कहते-कहते
- साकिब लखनवी 

ये न थी हमारी किस्मत कि विसाले-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिजार होता
- ग़ालिब 

कुछ ऐसे सिलसिले भी चले ज़िंदगी के साथ
कड़ियां मिलीं जो उनकी तो ज़ंजीर बन गए
- यूसुफ़ बहजाद

मुख़ालफ़त से मेरी शख़्सियत संवरती है
मैं दुश्मनों का बड़ा एहतेराम करता हूं
- बशीर बद्र 

कोई आज तक न समझा कि शबाब है तो क्या है
यही उम्र जागने की, यही नींद का ज़माना
- नुसूर वाहिदी 
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7 वर्ष पहले

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