22 मार्च को विश्व जल दिवस है। दुनिया में 79 फीसदी भाग में पानी है और 21 फीसदी भाग में धरती है। इसके बाद भी आए दिन हमें पानी की कमी से जूझ रहे लोगों की तस्वीर देखने को मिल जाती है। पानी बिना इस दुनिया में सब सूना है। जल दिवस हमें जल संरक्षण की याद दिलाता है। इस दिन हम विशेष कार्यशाला, सेमीनार और अन्य आयोजन करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हम काव्य चर्चा सेक्शन में अपने पाठकों के लिए पानी पर कहे गए बड़े शायरों के 10 शेर पेश कर रहे हैं।
अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना
हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है
-बशीर बद्र
ऐसी प्यास और ऐसा सब्र
दरिया पानी पानी है
-विकास शर्मा राज़
वो धूप थी कि ज़मीं जल के राख हो जाती
बरस के अब के बड़ा काम कर गया पानी
-लईक़ आजिज़
दूर तक फैला हुआ पानी ही पानी हर तरफ़
अब के बादल ने बहुत की मेहरबानी हर तरफ़
- शबाब ललित
अगर ऐ नाख़ुदा तूफ़ान से लड़ने का दम-ख़म है
इधर कश्ती न ले आना यहाँ पानी बहुत कम है
-दिवाकर राही
किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी
झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी
-आरज़ू लखनवी
हम इंतिज़ार करें हम को इतनी ताब नहीं
पिला दो तुम हमें पानी अगर शराब नहीं
-नूह नारवी
अंदर अंदर खोखले हो जाते हैं घर
जब दीवारों में पानी भर जाता है
-ज़ेब ग़ौरी
हर्फ़ अपने ही मआनी की तरह होता है
प्यास का ज़ाइक़ा पानी की तरह होता है
-फ़ैसल अजमी
मैंने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए
-राहत इंदौरी
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