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स्मृति शेष: ये हैं विष्णु खरे की 5 बड़ी कविताएं...

Vishnu Khare top 5 poetry in hindi
                
                                                         
                            हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि और हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष विष्णु खरे अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका निधन साहित्य जगत में एक अपूरणीय क्षति है। अपने विशद अध्ययन और विपुल साहित्य से हिंदी जगत को अनमोल संपदा देने वाले खरे की ये हैं 5 प्रमुुख कविताएं...  
                                                                 
                            

                                                                 
                            

कहो तो डरो...

कहो तो डरो कि हाय यह क्यों कह दिया
न कहो तो डरो कि पूछेंगे चुप क्यों हो

सुनो तो डरो कि अपना कान क्यों दिया
न सुनो तो डरो कि सुनना लाजिमी तो नहीं था

देखो तो डरो कि एक दिन तुम पर भी यह न हो
न देखो तो डरो कि गवाही में बयान क्या दोगे

सोचो तो डरो कि वह चेहरे पर न झलक आया हो
न सोचो तो डरो कि सोचने को कुछ दे न दें

पढ़ो तो डरो कि पीछे से झाँकने वाला कौन है
न पढ़ो तो डरो कि तलाशेंगे क्या पढ़ते हो

लिखो तो डरो कि उसके कई मतलब लग सकते हैं
न लिखो तो डरो कि नई इबारत सिखाई जाएगी

डरो तो डरो कि कहेंगे डर किस बात का है
न डरो तो डरो कि हुक़्म होगा कि डर

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अक्स.....

8 वर्ष पहले

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