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जन्मदिन विशेष : इश्क़ की नाजुक़मिज़ाजी पर वसीम बरेलवी के उम्दा 10 शेर... 

प्रेम
                
                                                         
                            उर्दू साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाले शायर वसीम बरेलवी इश्क़ कई पक्षों को अपनी शाइरी में उतारते हैं। इश्क़मिज़ाजी तो उर्दू शाइरी का हिस्सा रहा है लेकिन वसीम अपनी शाइरी में प्रेम को जिस तरह ढालते हैं वह किसी अल्हड़ नव प्रेमी जोड़ों के मन को दर्शाता है। आइए पढ़ते हैं उनके 10 उम्दा शेर  
                                                                 
                            

मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है 
जो दिल में है उसे आँखों से कहलाना ज़रूरी है 
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तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे...

8 वर्ष पहले

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