औरों का धन सोना चांदी अपना धन तो प्यार रहा
दिल से जो दिल का होता है वो अपना व्यापार रहा
- गोपालदास नीरज
आबाद अगर न दिल हो तो बरबाद कीजिए
गुलशन न बन सके तो बयाबाँ बनाइए
- जिगर मुरादाबादी
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