ग़ज़ल और शायरी एक नाजुक और कोमल कला है। उर्दू शायरी से शाद अज़ीमाबादी इश्क़ पवित्र और उच्च है। आइये पढ़ते हैं उनके कुछ शेर-
दिल है किधर खिंचा हुआ, महव है किसकी याद में
क्या कहें इसकी वजह हम, तर्क हुई नमाज क्यों
यही है धुन कि तेरी जलवागाह में जाकर
हजार आंखें हों और सबसे यार को देखें
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...कि मुद्दत में यह असर आया
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