आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कराची के शायर 'तेग इलाहाबादी' के मशहूर शेर

मुस्तफा जैदी
                
                                                         
                            तेग इलाहाबादी जिनका असली नाम मुस्तफ़ा ज़ैदी था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले तेग विभाजन से पहले तक यही रहे और विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए। कराची में बैठकर शायरी करने वाले 'तेग' अपने नाम के आगे 'इलाहाबादी' होने की स्मृति को कभी नहीं दफ़न कर पाये। 
                                                                 
                            

उनकी शायरी में उनकी स्मृतियों का ये दर्द महसूस किया जा सकता है।
आगे पेश है उनके चुनिंदा शेर----  

इश्क़ इन ज़ालिमों की दुनिया में

इश्क़ इन ज़ालिमों की दुनिया में
कितनी मज़लूम ज़ात है ऐ दिल

 

इस तरह होश गँवाना भी कोई बात नहीं
और यूँ होश से रहने में भी नादानी है

आगे पढ़ें

इश्क़ इन ज़ालिमों की दुनिया में

6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर