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निराला का काव्य और पूंजीवाद का विरोध...

निराला
                
                                                         
                            सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के काव्य में सामाजिक चेतना काफी मुखर ढंग से सवाल जवाब करती है। निराला ने कुकुरमुत्ता कविता में पूंजीवाद पर करारे प्रहार किए हैं। गुलाब को बुर्जुआवादी मानसिकता का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कुकुरमुत्ता को सर्वहारा वर्ग का प्रतीक बताते हुए विचार व्यक्त किए हैं।
                                                                 
                            

मैं कुकुरमुत्ता हूँ,
पर बेन्जाइन वैसे
बने दर्शनशास्त्र जैसे।
ओमफ़लस और ब्रहमावर्त
वैसे ही दुनिया के गोले और पर्त
जैसे सिकुड़न और साड़ी,
ज्यों सफ़ाई और माड़ी।
कास्मोपालिटन और मेट्रोपालिटन
जैसे फ़्रायड और लीटन।
फ़ेलसी और फ़लसफ़ा
जरूरत और हो रफ़ा।
सरसता में फ़्राड
केपिटल में जैसे लेनिनग्राड।
सच समझ जैसे रकीब
लेखकों में लण्ठ जैसे खुशनसीब आगे पढ़ें

निराला के काव्य का मूल तत्व मानवतावाद है...

8 वर्ष पहले

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