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Ramcharitmanas: गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं- कपटी झूठ बोलते हैं और झूठ ही ओढ़ते हैं

साहित्य
                
                                                         
                            खलन्ह हृदयँ अति ताप बिसेषी। जरहिं सदा पर संपति देखी॥
                                                                 
                            
जहँ कहुँ निंदा सुनहिं पराई। हरषहिं मनहुँ परी निधि पाई॥


भावार्थ:- दुष्टों के हृदय में बहुत अधिक संताप रहता है। वे दूसरों की संपत्ति (सुख) देखकर सदा जलते रहते हैं। वे जहाँ कहीं दूसरे की निंदा सुनते हैं, वहाँ ऐसे प्रसन्न होते हैं जैसे कोई रास्ते में पड़े खजाने को पाकर खुश होता है।

काम क्रोध मद लोभ परायन। निर्दय कपटी कुटिल मलायन॥
बयरु अकारन सब काहू सों। जो कर हित अनहित ताहू सों॥


भावार्थ:- वे काम, क्रोध, मद और लोभ के अधीन होते हैं और निर्दयी, कपटी, कुटिल और पापों के घर होते हैं। वे बिना कारण ही सभी से बैर किया करते हैं। जो भलाई करता है उसके साथ भी बुराई ही करते हैं।
 
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3 वर्ष पहले

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