आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मानवता को राष्ट्रवाद से ऊंचा स्थान दिया रबीन्द्रनाथ टैगोर ने

rabindranath tagore
                
                                                         
                            कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर को गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। 7 अगस्त 1941 को उन्होंने कोलकाता में अंतिम सांस ली। गुरुदेव बहुआयामी प्रतिभा वाली शख़्सियत थे। वे कवि, साहित्यकार, दार्शनिक, नाटककार, संगीतकार और चित्रकार थे। विश्वविख्यात महाकाव्य गीतांजलि की रचना के लिये उन्हें 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साहित्य के क्षेत्र में नोबेल जीतने वाले वे अकेले भारतीय हैं।
                                                                 
                            

धीरे चलो, धीरे बंधु लिए चलो धीरे 
मंदिर में, अपने विजन में 
पास में प्रकाश नहीं, पथ मुझको ज्ञात नहीं 
छाई है कालिमा घनेरी 
चरणों की उठती ध्वनि आती बस तेरी
रात है अँधेरी                                           
हवा सौंप जाती है वसनों की वह सुगंधि,
तेरी, बस तेरी 
उसी ओर आऊँ मैं, तनिक से इशारे पर,
करूँ नहीं देरी 
आगे पढ़ें

दिन पर दिन चले गए पथ के किनारे

2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर