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'पैग़ाम' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

paigham shayari collection
                
                                                         
                            

एक तख़्ती अम्न के पैग़ाम की
टांग दीजे ऊंचे मीनारों के बीच
- अज़ीज़ नबील


पैग़ाम ज़िंदगी ने दिया मौत का मुझे
मरने के इंतिज़ार में जीना पड़ा मुझे
- सफ़ी लखनवी

रात दिन नामा-ओ-पैग़ाम कहां तक दोगे
साफ़ कह दीजिए मिलना हमें मंज़ूर नहीं
- हसरत मोहानी


कहा क्या जाने क्या पैग़ाम-बर से
बहुत ख़ुश आज आता है उधर से
- लाला माधव राम जौहर

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5 वर्ष पहले

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