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बनारस दुनिया के दिल का नुक़्ता है: मिर्ज़ा ग़ालिब 

बनारस दुनिया के दिल का नुक़्ता है: मिर्ज़ा ग़ालिब
                
                                                         
                            मिर्ज़ा ग़ालिब की बनारस-यात्रा मशहूर है। उन्होंने बनारस में जो कुछ भी देखा था उसे अपने एक मसनवी 'चिराग-ए-दैर' में लिखा, यह मसनवी उन्होंने फ़ारसी में लिखी थी। बनारस पहुंचकर जब ग़ालिब ने वहां 3 हफ़्ते गुज़ारे और शहर से परिचित हो गए तब उन्होंने अपने दोस्त मौलवी मोहम्मद अली खां को एक लंबा पत्र लिखा। इस पत्र में बनारस के संबंध में उनकी मन:स्थितियों का बेहद मार्मिक चित्रण मिलता है। वे लिखते हैं-  
                                                                 
                            

''जब मैं बनारस में दाखिल हुआ, उस दिन पूरब की तरफ़ से जान बख़्शने वाली, जन्नत की- सी हवा चली, जिसने मेरे बदन को तवानाई अता की और दिल में एक रूह फूंक दी। उस हवा के करिश्माई असर ने मेरे जिस्म को फ़तह के झण्डे की तरह बुलंद कर दिया। ठण्डी हवा की लहरों ने मेरे बदन की कमजोरी दूर कर दी।'' आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

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