तुझ सा कोई जहान में नाज़ुक-बदन कहां
ये पंखुड़ी से होंट ये गुल सा बदन कहां
थमे आंसू तो फिर तुम शौक़ से घर को चले जाना
कहां जाते हो इस तूफ़ान में पानी ज़रा ठहरे
जो दोस्त हैं वो मांगते हैं सुल्ह की दुआ
दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
समझा लिया फ़रेब से मुझ को तो आप ने
दिल से तो पूछ लीजिए क्यूं बे-क़रार है
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X