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सुप्रसिद्ध कवि केदारनाथ अग्रवाल की चुनिंदा 3 कविताएं

kedarnath agrawal selected 3 hindi kavita
                
                                                         
                            

जीवन से

ऐसे आओ
जैसे गिरि के श्रृंग शीश पर
रंग रूप का क्रीट लगाये
बादल आये,
हंस माल माला लहराये
और शिला तन-
कांति-निकेतन तन बन जाये।
तब मेरा मन
तुम्हें प्राप्त कर
स्वयं तुम्हारी आकांक्षा का
बन जायेगा छवि सागर,
जिसके तट पर,
शंख-सीप-लहरों के मणिधर
आयेंगे खेलेंगे मनहर,
और हंसेगा दिव्य दिवाकर।

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आज नदी बिलकुल उदास थी

5 वर्ष पहले

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