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Kashti shayari

काव्य चर्चा

एहसास के समंदर में गोते लगाती 'कश्ती' पर शायरों के अल्फ़ाज़

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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कश्ती को ग़ज़लों में कई तरह के बिम्ब की तरह प्रयोग किया गया है। कभी वह जीवन के भंवर से उबारती है तो कभी तूफ़ानो का सामना करती है। जानें और किन अर्थों में कश्ती के सहारे शायरों ने अपने कलामों को किनारे पर लगाया है। 

कश्ती को कश्ती कह देना मुमकिन था आसान न था
दरियाओं की ख़ाक उड़ाई मल्लाहों से यारी की
- ज़ुल्फ़िक़ार आदिल


मोहब्बत एक कश्ती मुख़्तसर सी
तमन्नाओं का दरिया बे-कराँ है
- बकुल देव

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