कर्नाटक में चुनावी जीत विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए खुशियां लेकर आई है। जीत में नेता ही नहीं हर कोई प्रसन्न हो जाता है। जीत आपमें जोश भर देती है। आप उत्साह से दो गुनी ऊर्जा के साथ कार्य करने लगते हैं। हम यहां चुनावी माहौल में जीत और उसके जश्न पर 20 बड़े दमदार शेर पेश कर रहे हैं।
सियासत की अपनी अलग इक जबां है
लिखा हो जो इकरार, इनकार पढ़ना
-अज्ञात
कैसे कैसे हैं रहबर हमारे
कभी इस किनारे, कभी उस किनारे
-'राज' इलाहाबादी
न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा
-राहत इंदौरी
तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर
सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर
-अमीर मीनाई
रास्ता सोचते रहने से किधर बनता है
सर में सौदा हो तो दीवार में दर बनता है
-जलील आली
वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो
हौसले मुश्किलों में पलते हैं
-महफूजुर्रहमान आदिल
मैं बोलता गया हूँ वो सुनता रहा ख़ामोश
ऐसे भी मेरी हार हुई है कभी कभी
-वसीम बरेलवी
गुमशुदगी ही अस्ल में यारो राह-नुमाई करती है
राह दिखाने वाले पहले बरसों राह भटकते हैं
-हफ़ीज़ बनारसी
जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर
ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की
-जमील मज़हरी
ग़ुलामी में न काम आती हैं शमशीरें न तदबीरें
जो हो ज़ौक़-ए-यक़ीं पैदा तो कट जाती हैं ज़ंजीरें
-अल्लामा इक़बाल
वो पूछता था मिरी आँख भीगने का सबब
मुझे बहाना बनाना भी तो नहीं आया
-वसीम बरेलवी
उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए
कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए
-इरफ़ान सिद्दीक़ी
चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल
हौसला किस का बढ़ाता है कोई
-शकील बदायुंनी
अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल
हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया
-जिगर मुरादाबादी
कपड़े सफ़ेद धो के जो पहने तो क्या हुआ
धोना वही जो दिल की सियाही को धोइए
-शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
ऐ मौज-ए-बला उन को भी ज़रा दो चार थपेड़े हल्के से
कुछ लोग अभी तक साहिल से तूफ़ाँ का नज़ारा करते हैं
-मुईन अहसन जज़्बी
जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता
-वसीम बरेलवी
अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा
-महशर बदायूंनी
अभी से पाँव के छाले न देखो
अभी यारो सफ़र की इब्तिदा है
-एजाज़ रहमानी
नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं
-अकबर इलाहाबादी
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रहबर...
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