सोलहवें ज़ीने पे सूरज था 'उबैद'
जनवरी की इक सलोनी शाम थी
- एजाज़ उबैद
यकुम जनवरी है नया साल है
दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है
- अमीर क़ज़लबाश
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X