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बहुत आसान है यह कह देना कि दुष्यंत यानि हिंदी का शायर...

dushyant kumar
                
                                                         
                            बहुत आसान है यह कह देना कि दुष्यंत एक बे-बेहर का शायर है, बहुत आसान है यह कह देना कि दुष्यंत हिंदी का शायर है इसलिए उसके यहां व्याकरण का बचकाना दोष है और बहुत आसान यह भी कह देना है कि मुट्ठी भर ग़ज़लें कह कर कोई बड़ा शायर नहीं बन जाता।
                                                                 
                            

मगर बहुत कठिन है यह बात स्वीकार कर पाना कि मुट्ठी भर ग़ज़लें कहने वाला यह बे-बेहर शायर अपनी झोली में कम से कम दो दर्जन ऐसे शेर लिए बैठा है जो अब इतने बड़े हो गए हैं कि किताबों की क़ैद से बाहर निकल आए हैं और इतने तेज़ रफ्तार भी हो गए हैं कि सरहदों को मुंह चिढ़ाते हुए शायरी समझने वाले लगभग सभी देशों में घूम आए हैं।
 

आम से दिखने वाले इस शायर को इतनी शोहरत कैसे हासिल हो गयी? इसका जवाब यह है कि दुष्यंत ने कभी भी शायरी अपने लिए नहीं की बल्कि जब भी कलम उठायी, अपने लोगों के लिए उठायी। जब भी दुख ज़ाहिर किया उन लोगों का किया जिनका दुख दुनिया के लिए कोई मायने नहीं रखता। वही लोग जो अपने दुख अपने सीनों में लिए जीते रहते हैं और ऐसे ही मर जाते हैं। शायर जब अपने दुखों को शब्द देने लगता है तो उसकी शायरी में हल्की- हल्की चिंगारियां नज़र आने लगती हैं और पढ़ने सुनने वालों को धीमी - धीमी आंच महसूस होने लगती है।
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4 वर्ष पहले

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