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मोहब्बत और ज़िंदगी में 'दर्द' पर ये हैं 20 बेहतरीन शेर....

दर्द शायरी
                
                                                         
                            ख़ुशी, ग़म, दर्द जैसे शब्द हमारी ज़िंदगी में इस तरह रचे-बसे हुए हैं कि गाहे-बगाहे इनसे भेंट होती रहती है। शायर जब अपने दर्द को इकट्ठा करता है और उसे अपने अल्फ़ाज़ों से सजाता है, फिर जो शेर बनते हैं वो दर्द का इलाज भले ही ना कर पाएं लेकिन कुछ देर के लिए मरहम का काम ज़रूर करते हैं। पेश है 'दर्द' पर चुनिंदा शायरों के अल्फ़ाज़- 
                                                                 
                            

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे 
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे 
- वसीम बरेलवी

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया 
जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया 
- शकील बदायुनी

बेनाम सा ये दर्द

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है 
उनकी आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं 
- ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता 
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता 
- निदा फ़ाज़ली

अब के सफ़र में दर्द के पहलू अजीब हैं 
जो लोग हम-ख़याल न थे हम-सफ़र हुए 
- खलील तनवीर
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बेनाम सा ये दर्द

7 वर्ष पहले

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