'तन्हाई' कविता और शायरी में ज़्यादातर महबूब से अलगाव के परिणाम के रूप में आती है। लेकिन अकेलापन ऐसी बीमारी है कि किसी भी रूप में हमारे सामने आ सकती है। पेश है अकेलेपन पर शायरों के चुनिंदा अशआर....
एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक
जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा
~निदा फ़ाज़ली
अब इस घर की आबादी मेहमानों पर है
कोई आ जाए तो वक़्त गुज़र जाता है
~ज़ेहरा निगाह
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