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चंद्रकांत देवताले: सच का सामना और प्रेम के तारों से जुड़ा काव्य संकल्प...

चंद्रकांत देवताले
                
                                                         
                            हिंदी के प्रसिद्ध कवि चंद्रकांत देवताले अकविता आंदोलन में अग्रणी कवि रहे। इनकी कविताओं की जड़ें गांव-कस्बों और निम्न मध्यवर्ग के जीवन मेें है। इन्होंने मानव जीवन और उसकी विविधताओं की पुरजोर व्याख्या की है। सरल शब्दों में लिखी उनकी कविताओं में समस्याओं को इंगित करते हुए एक निष्कर्ष बहता है जो पाठकों को सहज ही बहा ले जाता है। यहां देवताले की 5 कविताएं समाज के सच को उजागर कर रही हैं।
                                                                 
                            
 

अगर तुम्हें नींद नहीं आ रही...

अगर तुम्हें नींद नहीं आ रही
तो मत करो कुछ ऐसा
कि जो किसी तरह सोए हैं उनकी नींद हराम हो जाए

हो सके तो बनो पहरुए
दुःस्वप्नों से बचाने के लिए उन्हें
गाओ कुछ शान्त मद्धिम
नींद और पके उनकी जिससे

सोए हुए बच्चे तो नन्हें फरिश्ते ही होते हैं
और सोई स्त्रियों के चेहरों पर
हम देख ही सकते हैं थके संगीत का विश्राम
और थोड़ा अधिक आदमी होकर देखेंगे तो
नहीं दिखेगा सोये दुश्मन के चेहरे पर भी
दुश्मनी का कोई निशान

अगर नींद नहीं आ रही हो तो
हँसो थोड़ा , झाँको शब्दों के भीतर
ख़ून की जाँच करो अपने
कहीं ठंडा तो नहीं हुआ
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अगर तुम्हें नींद नहीं आ रही...

8 वर्ष पहले

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