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नागार्जुन

मैं इनका मुरीद

बाबा नागार्जुन मतलब- जन कवि हूं मैं साफ कहूंगा क्यों हकलाऊं...

रत्नेश मिश्र, काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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जनता मुझसे पूछ रही है क्या बतलाऊं 
जन कवि हूं मैं साफ कहूंगा क्यों हकलाऊं


ये पंक्तियां सही मायनों में जन कवि बाबा नागार्जुन की पहचान हैं। साफगोई और जन सरोकार के मुद्दों की मुखरता से तरफदारी उनकी विशेषता रही। अपने समय की हर महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रहार करती कवितायें लिखने वाले बाबा नागार्जुन एक ऐसी हरफनमौला शख्सियत थे जिन्होंने साहित्य की अनेक विधाओं और भाषाओं में लेखन के साथ-साथ जनान्दोलनों में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और कुशासन के खिलाफ तनकर खड़े रहे।  आगे पढ़ें

रोजी-रोटी हक की बातें जो भी मुंह पर लाएगा 

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