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'जम्हूरियत' पर ये हैं 10 बड़े शेर....

शायरी
                
                                                         
                            कर्नाटक में हालिया संपन्न चुनाव का परिणाम स्पष्ट रूप से किसी के पक्ष में नहीं रहा। सियासी पारा भी चढ़ने लगा है। इस बीच जम्हूरियत पर बहस तेज हो गई है।  लोकतंत्र को शआयरों ने अपने नजरिए से देखा है। इसलिए शेरों-शायरी की श्रृंखला में आज हम पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं जम्हूरियत पर शायरों के अशआर-  
                                                                 
                            

जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिसमें
बंदों को गिना करते हैं, तौला नहीं करते
-अल्लामा इक़बाल

वो आए देख ले आकर

तो उससे कह दो कि वो आए देख ले आकर
लगाया हमने था जम्हूरियत का जो पौधा
-जावेद अख़्तर

नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है
- राहत इंदौरी
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वो आए देख ले आकर

8 वर्ष पहले

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