अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- तारक, जिसका अर्थ है- 1. तारों से भरा 2. तारा; नक्षत्र 3. आँख की पुतली 4. नौका 5. एक मंत्र 6. एक पौराणिक दैत्य जो इंद्र का शत्रु था 7. एक उपनिषद। [वि.] तारने या पार लगाने वाला।। प्रस्तुत है महादेवी वर्मा की कविता-
आज मेरे नयन के #तारक हुए जलजात देखो !
अलस नभ के पलक गीले,
कुन्तलों से पोंछ आई;
सघन बादल भी प्रलय के
श्वांस से मैं बाँध लाई;
पर न हो निस्पन्दता में चंचला भी स्नात देखो !
मूक प्राणायाम में लय-
हो गई कम्पन अनिल की;
एक अचल समाधि में थक,
सो गई पलकें सलिल की;
प्रात की छवि ले चली आई नशीली रात देखो !
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