अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- सौरभ, जिसका अर्थ है- 1. सुगंध; सुवास; ख़ुशबू; महक 2. केसर। प्रस्तुत है भगवतीचरण वर्मा की कविता- कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें...
कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें।
जीवन-सरिता की लहर-लहर,
मिटने को बनती यहां प्रिये
संयोग क्षणिक, फिर क्या जाने
हम कहां और तुम कहां प्रिये।
पल-भर तो साथ-साथ बह लें,
कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें।
आओ कुछ ले लें औ' दे लें।
हम हैं अजान पथ के राही,
चलना जीवन का सार प्रिये
पर दुःसह है, अति दुःसह है
एकाकीपन का भार प्रिये।
पल-भर हम-तुम मिल हंस-खेलें,
आओ कुछ ले लें औ' दे लें।
हम-तुम अपने में लय कर लें।
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X