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आज का शब्द - मल्लार और गोपालदास "नीरज" की कविता : उनकी याद हमें आती है

Aaj ka Shabd Mallar Malhar
                
                                                         
                            अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त  करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने 'हिंदी हैं हम' अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- मल्लार, जिसका अर्थ है- वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला एक राग; मलार। प्रस्तुत है गोपालदास "नीरज" की कविता : उनकी याद हमें आती है
                                                                 
                            

मधुपुर के घनश्याम अगर कुछ पूछें हाल दुखी गोकुल का
उनसे कहना पथिक कि अब तक उनकी याद हमें आती है।

बालापन की प्रीति भुलाकर
वे तो हुए महल के वासी,
जपते उनका नाम यहाँ हम
यौवन में बनकर संन्यासी
सावन बिना मल्लार बीतता, फागुन बिना फाग कट जाता,
जो भी रितु आती है बृज में वह बस आँसू ही लाती है।
मधुपुर के घनश्याम...
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5 वर्ष पहले

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