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आज का शब्द- धीर और रामधारी सिंह "दिनकर" की कविता: जाग रहे हम वीर जवान

आज का शब्द

आज का शब्द- धीर और रामधारी सिंह "दिनकर" की कविता: जाग रहे हम वीर जवान

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- धीर, जिसका अर्थ है-  जो जल्दी विचलित न हो, समुद्र, बुद्ध का नाम अथवा धैर्य न खोने वाला। प्रस्तुत है रामधारी सिंह "दिनकर" की कविता- जाग रहे हम वीर जवान...

जाग रहे हम वीर जवान,
जियो जियो अय हिन्दुस्तान !
हम प्रभात की नई किरण हैं, हम दिन के आलोक नवल,
हम नवीन भारत के सैनिक, #धीर, वीर,गंभीर, अचल ।
हम प्रहरी ऊंचे हिमाद्रि के, सुरभि स्वर्ग की लेते हैं ।
हम हैं शान्तिदूत धरणी के, छांह सभी को देते हैं।
वीर-प्रसू माँ की आंखों के हम नवीन उजियाले हैं
गंगा, यमुना, हिन्द महासागर के हम रखवाले हैं।
तन मन धन तुम पर कुर्बान,
जियो जियो ऐ हिन्दुस्तान आगे पढ़ें

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