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इज़हार-ए-इश्क़: 'गुलाब' पर ये हैं 10 उम्दा शेर... 

गुलाब
                
                                                         
                            मोहब्बत का गुलाब से कोई तो रिश्ता है जिसे बयां करना मुश्किल है, लेकिन यह रिश्ता  इतना महकदार है कि आशिक से लेकर कवि और दोस्तों से लेकर शायर तक झूम उठते हैं। इज़हार-ए-इश्क़ का प्रतीक बन गया गुलाब सौन्दर्य में नयेपन और सृजन का अहसास कराता है। 
                                                                 
                            

ऐसा इसलिये है कि फरवरी का महीना और बसंत ऋतु, दोनों साथ-साथ यात्रा करते हैं।  फरवरी में रोज-डे के साथ वैलेंटाइन वीक की शुरुआत 7 फरवरी से हो जाती है। लोग रोज डे के दिन प्यार के रूप में या दोस्त के रूप एक दूसरे को पीले, लाल, सफेद, गुलाबी रंग के गुलाब देते देते हैं।

 शायर अपनी इन गुलाबी अनुभूतियों को कलमबंद करते हैं।  आईए पढ़ते हैं मशहूर शायरों के अहसास, गुलाब के फूल पर-  

मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूं 
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता 
-अफ़ज़ल इलाहाबादी

सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे 
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा 
-जावेद अनवर
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तुम्हारे इश्क़ की शबनम की बूँद पी मैंने...

8 वर्ष पहले

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