आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Rang Panchami 2022: हेमंत देवलेकर की कविता- गलियों में बेतहाशा मची हुई है रंगपंचमी

कविता
                
                                                         
                            एक
                                                                 
                            

कलर बॉक्स से ऊबकर
भागे हुए रंग
चित्रकार की
मर्ज़ी पूछे बिना
ख़ुद ही फैल जाना चाहते हैं
पानी के कैनवास पर

लहरों के 
सजे-सँवरे सुंदर चेहरे,
उनकी थिरकती देह 
और उनके लोकगीत
बन गए हैं रंग
जो अब कलर बॉक्स में
ढूंढ़ने पर भी नहीं मिलने वाले आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर